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कुर्सी संभालते ही एक्शन मोड में आयुक्त, इंदौर में अचानक निरीक्षण से मचा हड़कंप



➡️ कुर्सी संभालते ही एक्शन मोड में आयुक्त, इंदौर में अचानक निरीक्षण से मचा हड़कंप...!

➡️ बच्चों के बीच पहुंचे संदीप जी.आर., अफसरों से नहीं सीधे बच्चों से जाना हाल...!

➡️ सिर्फ आश्रय नहीं, हुनर और हौसले से बच्चों का भविष्य संवारने का प्लान..!

➡️ वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं से आमने-सामने संवाद, सेवाओं की जमीनी हकीकत परखी..!

➡️ सिस्टम को दो टूक संदेश—लापरवाही मिली तो सुधार नहीं, तत्काल कार्रवाई होगी..!

Mahfooz khan:-
इंदौर। महिला एवं बाल विकास विभाग के नए आयुक्त श्री संदीप जी.आर. ने पदभार संभालते ही अपने तेवर साफ कर दिए हैं। शुक्रवार को इंदौर पहुंचते ही उन्होंने विभागीय योजनाओं और बाल संस्थाओं की जमीनी हकीकत परखी। छावनी स्थित राजकीय बाल आश्रम, ऑब्जर्वेशन होम (संप्रेक्षण गृह), स्पेशल होम और वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

आयुक्त ने सिर्फ अधिकारियों से रिपोर्ट लेने तक सीमित रहने के बजाय बच्चों और महिलाओं से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं, जरूरतें तथा संस्थाओं में मिल रही सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानी।

बच्चों के बीच पहुंचे आयुक्त, पढ़ाई से लेकर भविष्य तक पूछी पूरी बात
राजकीय बाल आश्रम में आयुक्त श्री संदीप जी.आर. ने वहां रह रहे बच्चों से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने बच्चों का कुशलक्षेम पूछा और शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य तथा अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों से संबंधित सभी अभिलेख व्यवस्थित, अद्यतन और पारदर्शी तरीके से संधारित किए जाएं।
इसके बाद ऑब्जर्वेशन होम और स्पेशल होम पहुंचकर उन्होंने बच्चों से विस्तार से बातचीत की। पढ़ाई कैसी चल रही है, भविष्य में क्या करना चाहते हैं, किस क्षेत्र में रुचि है और किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है—आयुक्त ने बच्चों से सीधे इन मुद्दों पर जानकारी ली।

सिर्फ आश्रय नहीं, बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने का मिशन
आयुक्त श्री संदीप जी.आर. ने स्पष्ट किया कि बाल संस्थाओं में बच्चों को केवल रहने और खाने की सुविधा देना पर्याप्त नहीं है। उनका भविष्य मजबूत बनाना भी विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, ताकि संस्थाओं से निकलने के बाद बच्चे आत्मनिर्भर बन सकें।

वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं से सीधे लिया फीडबैक
राजकीय बाल आश्रम परिसर स्थित वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण करते हुए आयुक्त ने संकट एवं हिंसा से प्रभावित महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही आपातकालीन सहायता, परामर्श और विधिक सेवाओं की समीक्षा की।
उन्होंने सेंटर में मौजूद महिलाओं से सीधे बातचीत कर निःशुल्क सेवाओं के संबंध में उनका फीडबैक लिया। अधिकारियों से भी सेवाओं की स्थिति और उनके संचालन की जानकारी ली।

साफ संदेश—लापरवाही मिली तो तत्काल सुधार
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने संस्थाओं में स्वच्छता, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थाओं की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर कमी सामने आने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

फीडबैक बनेगा व्यवस्था सुधारने का आधार
आयुक्त श्री संदीप जी.आर. ने कहा कि बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर होनी चाहिए। इसके लिए उनसे नियमित फीडबैक लिया जाए और उनकी समस्याओं व सुझावों के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाल संस्थाओं में बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी जाए।

पदभार संभालते ही इंदौर में आयुक्त का यह मैदानी निरीक्षण विभागीय कामकाज को लेकर उनके सक्रिय और परिणामोन्मुखी रुख का साफ संकेत माना जा रहा है।

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